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मुर्गियों में लंगड़ापन क्यों होता है? कारण और जांच की पूरी जानकारी

पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों का चलते समय लड़खड़ाना, एक पैर पर वजन न देना, बार-बार बैठना या दोनों पैरों में कमजोरी दिखाई देना सामान्य रूप से लंगड़ापन या पैरों की समस्या के रूप में देखा जाता है। लेकिन हर बार लंगड़ापन केवल दाने की समस्या के कारण नहीं होता।

विशेष रूप से यदि फार्म के कुछ ही झुंडों में बार-बार लंगड़ापन दिखाई दे रहा हो और बाकी झुंड सामान्य हों, तो उस झुंड के वातावरण, बिछावन, फर्श, पानी, पक्षियों की संख्या, संक्रमण और प्रबंधन व्यवस्था की अलग से जांच करना बहुत जरूरी है।

🔹 1. पंजे के नीचे घाव और सूजन:
पैर के पंजे के नीचे काले दाग, घाव, सूजन या गहरा घाव दिखाई देना पंजे की त्वचा में सूजन और संक्रमण का संकेत हो सकता है।ऐसी स्थिति में चलते समय पक्षी को दर्द होता है और वह लंगड़ाने लगता है। अधिक वजन वाले पक्षियों में यह समस्या ज्यादा दिखाई दे सकती है।

क्या जांच करें?
• बिछावन गीला है या नहीं?
• फर्श कठोर या खुरदरा है या नहीं?
• पैरों पर लगातार दबाव तो नहीं पड़ रहा?
• पंजे के नीचे काले दाग या घाव तो नहीं हैं?

🔹 2. गीला बिछावन और अधिक अमोनिया:
पानी की निप्पल से रिसाव, खराब हवा का आवागमन या अधिक नमी के कारण बिछावन लगातार गीला रह सकता है।गीले बिछावन के कारण पंजे और घुटने के आसपास घाव तथा त्वचा की समस्या बढ़ सकती है।
इसलिए लंगड़ापन दिखाई देने पर बिछावन की स्थिति सबसे पहले जांचना चाहिए।

🔹 3. जोड़ में संक्रमण और सूजन:
यदि पैर के जोड़, विशेष रूप से पीछे का जोड़ या घुटना सूजा हुआ, गर्म या दर्दनाक दिखाई देता है, तो जोड़ में संक्रमण या सूजन की संभावना पर ध्यान देना चाहिए।कुछ जीवाणु, जैसे स्टैफिलोकोकस और ई. कोलाई, मुर्गियों में जोड़ और हड्डियों के संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इसके कारण लंगड़ापन हो सकता है।

🔹 4. कैल्शियम–फॉस्फोरस–विटामिन डी3 का असंतुलन
बढ़ती उम्र के पक्षियों में कैल्शियम या फॉस्फोरस की कमी अथवा उनका असंतुलन हड्डियों के विकास और मजबूती को प्रभावित कर सकता है।

इसके कारण:
• हड्डियां कमजोर होना
• पैरों का टेढ़ा होना
• चलने में परेशानी
• पैरों में कमजोरी

जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। इसलिए दाने में कैल्शियम, उपलब्ध फॉस्फोरस और विटामिन डी3 का संतुलन महत्वपूर्ण है।

🔹 5. हड्डियों का टेढ़ापन
कुछ पक्षियों में पैर की हड्डियों की सामान्य दिशा बदल सकती है।
• पैर टेढ़ा होना
• पंजा अंदर या बाहर मुड़ना
• एक या दोनों पैरों में असामान्य बनावट ऐसी स्थिति में आनुवंशिक कारण, पोषण और पालन-पोषण से जुड़े कारण एक साथ जिम्मेदार हो सकते हैं।

🔹 6. अधिक शरीर का वजन और तेजी से बढ़ना
जैसे-जैसे पक्षी का वजन बढ़ता है, वैसे-वैसे पैरों की हड्डियों और जोड़ों पर दबाव बढ़ता है। विशेष रूप से भारी वजन वाले नर पक्षियों में पैरों और जोड़ों पर अधिक दबाव पड़ने के कारण चलने में परेशानी दिखाई दे सकती है।

🔹 7. चोट, लड़ाई और फर्श से संबंधित समस्या
बड़े नर पक्षियों में:
• आपस में लड़ाई
• ज्यादा उछलना
• फिसलना
• असमान फर्श
• अधिक पक्षी संख्या
के कारण पैर में चोट, मांसपेशियों या नसों में चोट तथा हड्डी टूटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि समस्या ऐसे फार्म पे दिखाई दे रही है, तो उस जगह के फर्श की स्थिति और पक्षियों की गतिविधि को जरूर जांचना चाहिए।

🔹 8. माइकोप्लाज्मा और अन्य संक्रमण:
कुछ संक्रामक रोग जोड़ों और पैरों के आसपास के ऊतकों को प्रभावित कर सकते हैं।
यदि लंगड़ापन के साथ:
• जोड़ में सूजन
• सांस लेने में परेशानी
• नाक से स्राव
• कमजोरी
• मृत्यु दर में वृद्धि
जैसी समस्याएं भी दिखाई दे रही हों, तो पशु चिकित्सक की सहायता से संक्रमण की जांच करवाना आवश्यक है।

🔹 9. विटामिन और सूक्ष्म खनिजों की कमी:
कुछ विटामिन और सूक्ष्म खनिजों की कमी से हड्डियों का विकास, पैरों की मजबूती और पंजों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसलिए बार-बार लंगड़ापन दिखाई देने पर केवल कैल्शियम पर ध्यान देने के बजाय पूरे पोषण और खनिज संतुलन की जांच करनी चाहिए।

🔹 10. फार्म कर्मचारी / फार्मर की गलती :
विशेष रूप से फार्म में चलते समय फार्म कर्मचारी ने धीरे चलना चाहिए, फार्म में जोर से चलने पर बर्ड आगे आगे जोर से चलता है और इसे में बर्ड घबराने लगते है और वो भी एक के उप्पर एक चढ़ जाते है इस समय भी लँगड़ेपन की शिकायते बढ़ जाती है,

बहोत बार ऐसे भी दिखाई दिया है की फार्म के बाजु में मछली तालाब या धान की खेती है उस फार्म ने भी लगड़ेपन की समस्या ज्यादा दिखाई देती है।अभ्यासक को विशेष रूप से देखने पर ऐसा पता चला है की जहा पे पानी से भरे खेत है वहां जल्दी पानी खींचा जाता है।और फार्म में जमीन के निचे से पानी फार्म के निचे वाली जमीन में खींचा जाता है। फार्म की जमीन की लेवल निचे रहनेसे वह फार्म के जमीन में पानी पकड़ के रहता है। ऐसे में लीटर कन्टीन्यूस गिला रहता है। ऐसे में लँगड़ेपन की समस्या ज्यादा दिखाई देती है।अगर फीड में समस्या है तो सरे बर्ड एकसाथ लंगड़े होना जरुरी होता है। लेकिन जो विक ,कमजोर बर्ड है जिसे प्रॉब्लम ज्यादा फेस करना पड़ा वही बर्ड लंगड़ा पड़ता है। ऐसे ही अन्य करण हो सकते है,जिससे बार्ड लगदे होनी की समस्या फार्म में ज्यादा दिखाई दे सकती है।

🔍 फार्म पर लंगड़ापन दिखाई देने पर 10 बिंदुओं की जांच
लंगड़ाने वाले पक्षी को पकड़कर निम्नलिखित बातें ध्यान से देखें:

1️⃣ पंजे के नीचे काले दाग या घाव हैं?
2️⃣ पैर का पिछला जोड़ सूजा हुआ है?
3️⃣ घुटना सूजा हुआ है?
4️⃣ पैर की हड्डी टेढ़ी है?
5️⃣ चोट या हड्डी टूटने के लक्षण हैं?
6️⃣ एक पैर प्रभावित है या दोनों पैर?
7️⃣ बिछावन गीला है?
8️⃣ पानी की निप्पल से लगातार पानी टपक रहा है?
9️⃣ उस झुंड में पक्षियों की संख्या अधिक है?
🔟 उस झुंड का दाना, पानी का सेवन और शरीर का वजन दूसरे झुंडों से अलग है?

⭐ एक महत्वपूर्ण फार्म प्रबंधन सिद्धांत
“लंगड़ापन = केवल दाने की समस्या” ऐसा निष्कर्ष तुरंत नहीं निकालना चाहिए।
सही कारण पता करने के लिए:
पक्षी + दाना + पानी + बिछावन + फर्श + वातावरण + संक्रमण + प्रबंधन
इन सभी पहलुओं को एक साथ देखना आवश्यक है।

यदि एक ही फार्म के 25 झुंडों में से केवल 2 झुंडों में बार-बार लंगड़ापन दिखाई दे रहा है, तो उन दोनों झुंडों की तुलना सामान्य झुंडों से करना जांच का सबसे उपयोगी पहला कदम हो सकता है।

कई बार समस्या दाने में नहीं, बल्कि फर्श, बिछावन, पानी, हवा का आवागमन, पक्षियों की संख्या या स्थानीय प्रबंधन व्यवस्था में छिपी होती है।

🐔 अच्छा पोल्ट्री प्रबंधन केवल दाने को देखने से नहीं, बल्कि पक्षी को ध्यान से देखने से शुरू होता है।
लिखाण: ललित लांजेवार 
LALIT LANJEWAR
(AGM-SALES WEST INDIA ) 
EASY POULTRY FEEDS 
CONTACT: 9175937925


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