दिल्ली(ललित लांजेवार):
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की अस्थिर परिस्थितियों का भारत से मध्य-पूर्व देशों को होने वाले पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात पर कुछ हद तक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन इसका भारतीय पोल्ट्री उद्योग की समग्र वृद्धि पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। ऐसे यह बात Poultry Federation of India संयुक्त सचिव रिकी थापेर ने कही।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने 168.77 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात किया,(भारतीय रुपयोंमें १४०० करोड़ रूपये) जो मात्रा के हिसाब से 10.34 लाख टन रहा। भारतीय पोल्ट्री उत्पादों के प्रमुख निर्यात बाजारों में Oman, United Arab Emirates, Maldives, Indonesia और Vietnam शामिल हैं।
चालू वित्त वर्ष में विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात और ओमान से मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, थापर ने स्पष्ट किया कि कुल पोल्ट्री उद्योग के आकार की तुलना में निर्यात का हिस्सा अभी भी काफी छोटा है। इसलिए यदि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण निर्यात प्रभावित भी होता है, तो इसका उद्योग की कुल वृद्धि पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि भारतीय पोल्ट्री उद्योग का कुल मूल्य लगभग 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और यह प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 60 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है। देश में अंडों और ब्रॉयलर मांस की खपत में लगातार वृद्धि के कारण यह क्षेत्र प्रतिवर्ष 7 से 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
वर्तमान में देश में प्रतिवर्ष लगभग 5.5 अरब ब्रॉयलर (मांस उत्पादन हेतु) प्लेसमेंट होता है, जबकि लेयर (अंडा उत्पादन हेतु) की वार्षिक प्लेसमेंट लगभग 35 करोड़ है। इसके अलावा, देश में लगभग 4 करोड़ बैकयार्ड पोल्ट्री भी है।
भारत विश्व में अंडा उत्पादन के मामले में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जहां वार्षिक उत्पादन 142.6 अरब अंडों का है। थापर ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग और निरंतर उत्पादन वृद्धि के चलते पश्चिम एशिया का मौजूदा संघर्ष भारतीय पोल्ट्री उद्योग की समग्र प्रगति को प्रभावित करने की संभावना कम है।
0 Comments