नागपुर: ललित लांजेवार
गर्मियों में पोल्ट्री फार्म पर मुर्गियों का वजन बढ़ाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। विशेष रूप से महाराष्ट्र ,मध्यप्रदेश,गुजरात,तेलंगाना,आंध्र,सबसे ज्यादा महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र जैसे नागपुर, चंद्रपुर, अकोला, अमरावती, और तथा मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इस स्थिति में मुर्गियों को पसीना नहीं आता, जिससे उन्हें हीट स्ट्रेस होने का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर उनके फीड इनटेक और वजन वृद्धि पर पड़ता है।
 |
| कॉकरेल फीड के लिए संपर्क करे:9175937925 |
गर्मी के मौसम में यह समझना बहुत जरूरी है कि मुर्गियां सामान्य से 20 से 25 प्रतिशत कम दाना खाती हैं। अभी दाना कम खाना याना वजन भी कम बढ़ना यह सिंपल है। इस समय मुर्गी के शरीर का तापमान बढ़कर 41 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और शरीर की ऊर्जा ग्रोथ के बजाय मेंटेनेंस में खर्च होने लगती है। इसके कारण वजन बढ़ना कम हो जाता है। साथ ही मुर्गियां हांफने लगती हैं, जिससे शरीर में CO₂ की कमी होती है और एल्कलोसिस की स्थिति बनती है, जो ग्रोथ डिप्रेशन का कारण बनती है। यही वजह है कि किसान अक्सर कहते हैं कि दाना अच्छा है लेकिन वजन नहीं आ रहा।
 |
कॉकरेल फीड के लिए संपर्क करे:9175937925
|
अल्कलोसिस एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जिसमें शरीर का pH स्तर सामान्य से अधिक क्षारीय हो जाता है। जब मुर्गे गर्मी के कारण तेजी से सांस लेते हैं, तो उनके शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक निकल जाती है। इससे रक्त का संतुलन बिगड़ता है और शरीर अल्कलाइन हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को रेस्पिरेटरी अल्कलोसिस कहा जाता है, जो पोल्ट्री फार्मिंग में एक आम लेकिन गंभीर समस्या है।
पानी का प्रबंधन
ऐसी स्थिति में सही प्रबंधन ही एकमात्र समाधान है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण बिंदु पानी का प्रबंधन है। मुर्गियों को हमेशा ठंडा और साफ पानी उपलब्ध कराना चाहिए। पानी का तापमान लगभग 20 से 25 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। पानी की टंकियों को छाया में रखना चाहिए या उन पर गीली बोरी डालकर ठंडा बनाए रखना चाहिए। दिन में 2 से 3 बार पाइपलाइन का गर्म पानी निकाल देना चाहिए। पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स और विटामिन C मिलाने से शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है और हीट स्ट्रेस कम होता है। विटामिन C की मात्रा 100 से 200 मिलीग्राम प्रति लीटर पानी दी जा सकती है।
शेड का तापमान
दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु शेड का तापमान नियंत्रण करना। गर्मियों में शेड का तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के अंदर रखना आदर्श होता है, जबकि 32 डिग्री से ऊपर जाने पर ग्रोथ तेजी से गिरती है। शेड की छत पर सफेद चूना या सफ़ेद पेंट लगाने से सूरज की किरणें परावर्तित होती हैं और अंदर का तापमान कम रहता है। छत पर घास या पुआल डालना भी लाभदायक होता है। फॉगर्स और स्प्रिंकलर सिस्टम का उपयोग विशेष रूप से सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक करना चाहिए। साथ ही पंखे और अच्छी वेंटिलेशन व्यवस्था जरूरी है, जिससे हवा की गति 3 मीटर प्रति सेकंड बनी रहे। शेड के किनारों पर जूट की बोरियां या पर्दे लगाकर शेड के उप्पर से स्प्लीनकर का पानी उन लटकाये यूए बोर पर गिरना चाहिए ताकि अंदर आने वाली हवा ठंडी होती है।
 |
लेयर फीड के लिए संपर्क करे:9175937925
|
आहार प्रबंधन
तीसरा महत्वपूर्ण पहलू आहार प्रबंधन है। गर्मियों में दाना देने का समय बदलना जरूरी है। सुबह 5 से 11 बजे और शाम 5 से रातभर फीड देना चाहिए। दोपहर के समय दाना देने से बचना चाहिए। चूंकि मुर्गियां कम खाती हैं, इसलिए आहार में ऊर्जा की मात्रा बढ़ाना आवश्यक है। इसके लिए फीड में 2 से 3 प्रतिशत तक तेल या फैट मिलाया जा सकता है, जिससे हीट इन्क्रीमेंट कम होता है। प्रोटीन की मात्रा थोड़ी कम रखी जानी चाहिए क्योंकि ज्यादा प्रोटीन से शरीर में गर्मी बढ़ती है। साथ ही लाइसिन और मेथियोनिन जैसे अमीनो एसिड का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। बहोत बार ऐसा होता है की फार्मर फीड तो खिलता है, लेकिन वजन नहीं मिलता है, इसका अर्थ यही होता है की तापमान के बढ़नेसे यह होता है, और फार्मर फीड डीलरों को फोन कर बोलते है वजन नहीं बढ़ रहा है, जब की मुर्गी ३० डिग्री तापमान के उप्पर वजन कम देती है, उस हिसाब से दाना भी कम खाती है,
बर्ड डेंसिटी
पक्षियों की संख्या यानी बर्ड डेंसिटी पर भी ध्यान देना जरूरी है। गर्मियों में शेड की क्षमता से 10 से 15 प्रतिशत कम पक्षी रखने चाहिए। ज्यादा भीड़ होने पर हीट स्ट्रेस दोगुना हो जाता है और मुर्गियों को शरीर की गर्मी बाहर निकालने में परेशानी होती है।
.jpg) |
कॉकरेल फीड के लिए संपर्क करे:9175937925
|
टीकाकरण और दवाओं का प्रबंधन
टीकाकरण और दवाओं का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है। वैक्सीनेशन हमेशा सुबह जल्दी या रात के ठंडे समय में करना चाहिए। गर्मियों में लिवर टॉनिक का उपयोग बढ़ाने से पाचन क्रिया बेहतर रहती है और फीड का उपयोग सही तरीके से होता है। साथ ही विटामिन E और सेलेनियम, इलेक्ट्रोलाइट्स और टॉक्सिन बाइंडर का उपयोग करना भी फायदेमंद होता है क्योंकि गर्मियों में फीड खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
फार्मर को यह समझना भी जरूरी है कि गर्मियों में सर्दियों जैसा वजन नहीं मिलेगा। सामान्य रूप से 5 से 15 प्रतिशत तक वजन कम आना स्वीकार्य माना जाता है। इस मौसम में मुख्य लक्ष्य मृत्यु दर कम रखना और सभी पक्षियों की समान वृद्धि बनाए रखना होना चाहिए।
अगर फार्म पर कुछ लक्षण दिखाई दें जैसे मुर्गियों का मुंह खोलकर सांस लेना,जिसे पैन्टिन्ग बोलै जाता है, पंख फैलाना, अचानक दाना कम खाना या मृत्यु दर बढ़ना, तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे समय में तुरंत ठंडा पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स देना चाहिए, फॉगर्स चालू करने चाहिए और कुछ समय के लिए दाना बंद कर देना चाहिए।
गर्मियों में इज़ी फीड (Easy Poultry Feed) एक नया और प्रभावी विकल्प बनकर सामने आया है। उच्च तापमान के दौरान मुर्गियों का फीड इनटेक कम हो जाता है, इसलिए उन्हें संतुलित पोषण देना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
 |
ब्रॉयलर फीड के लिए संपर्क करे:9175937925
|
इज़ी फीड में गर्मियों के लिए आवश्यक सभी महत्वपूर्ण पोषक तत्व शामिल किए गए हैं। इसमें प्रोटीन होता है जो शरीर की वृद्धि और मांसपेशियों के विकास में मदद करता है। ऊर्जा (एनर्जी) शरीर के मेंटेनेंस और ग्रोथ के लिए जरूरी होती है। अमीनो एसिड जैसे लाइसिन और मेथियोनिन संतुलित विकास सुनिश्चित करते हैं। इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम, पोटैशियम और क्लोराइड हीट स्ट्रेस को कम करने में सहायक होते हैं। विटामिन C और E शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और तनाव को नियंत्रित करते हैं। इसके अलावा मिनरल्स पक्षियों के समग्र स्वास्थ्य और बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी होते हैं।
गर्मियों के मौसम में मुर्गियों से जुड़ी कई समस्याएं सामने आती हैं। इस दौरान पक्षी कम दाना खाते हैं, उनका वजन बढ़ना धीमा हो जाता है और हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इज़ी फीड को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
इस फीड का मुख्य उद्देश्य यह है कि कम फीड इनटेक के बावजूद मुर्गियों को पूरा और संतुलित पोषण मिल सके। इससे पक्षियों की ऊर्जा और शारीरिक संतुलन बना रहता है, जिससे उनकी ग्रोथ और परफॉर्मेंस में सुधार होता है।
 |
काउंटर फीड के लिए संपर्क करे:9175937925
|
अंत में यह समझना बहुत जरूरी है कि गर्मियों में वजन बढ़ाने के लिए कोई दवा काम नहीं करती, केवल सही प्रबंधन ही समाधान है। तापमान नियंत्रण, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सही उपयोग तथा फीडिंग टाइमिंग में बदलाव ये तीन गोल्डन रूल हैं, जिन्हें अपनाकर ही गर्मियों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
0 Comments